नई दिल्ली। अमेरिका ने चीन से आयातित 50 अरब डॉलर मूल्य कीमत की वस्तुओं पर 25 फीसदी का आयात शुल्क लगा दिया है। अमेरिका के इस फैसले से विश्व के अर्थ जगत में अमूल परिवर्तन देखने को मिल सकता है।
अमेरिका के इस ताजा फैसले से चीन और अमेरिका के बीच ट्रेड वॉर की संभावना है, जिससे व्यापारिक जंग का सूत्रपात हो सकता है। दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच व्यापारिक हितों को लेकर पिछले दिनों जो जुबानी जंग का सिलसिला शुरू हुआ था वह अब बड़े व्यापार-युद्ध की चेतावनी के रूप में दिखाई दे रहा है।
न्यूयार्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका ने बीजिंग पर बौद्धिक कॉपीराइट चोरी का आरोप लगाते कहा कि अगर चीन जवाबी कार्रवाई करता है जो वह दोबारा शुल्क लगाएगा। आयात शुल्क छह जुलाई से लागू होगा।
अमेरिका द्वारा लगाए गए शुल्क में मेड इन चाइना 2025 योजना से जुड़ी वस्तुएं शामिल होंगी। इस मामले में ट्रंप ने कहा कि आयात शुल्क लगाने का मकसद मुख्य रूप से अमेरिकी प्रौद्योगिकी और बौद्धिक संपदा का चीन को हस्तांतरण होने से रोकना है, जिससे अमेरिकी की नौकरियां बची रहेंगी। उन्होंने कहा कि “अमेरिका गलत तरीके से अपनी प्रौद्योगिकी और बौद्धिक संपदा को खोना अब बर्दाश्त नहीं कर सकता है।”
चीन ने जब जवाबी कार्रवाई करने की चेतावनी दी तो ट्रंप ने चीनी वस्तुओं पर शुल्क बढ़ाकर 100 अरब डॉलर करने की धमकी दी। मई के मध्य में दोनों देशों के बीच दो दौर की बातचीत के बाद उनके बीच व्यापारिक जुबानी जंग में कुछ समय के लिए विराम आया। लेकिन अब अमेरिका के इस फैसले के बाज फिर से व्यापारिक जंग की शुरुआत हो सकती है।






