जम्मू-कश्मीर में भाजपा-पीडीपी गठबंधन के टूटने का ये है तीन वजह

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नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर में भाजपा और पीडीपी की गठबंधन की सरकार खत्म हो चुकी है। बीजेपी ने पीडीपी सरकार से समर्थन वापस ले लिया है। समर्थन वापसी के बाद सीएम महबूबा ने राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंप दिया। लेकिन इस घटनाक्रम को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं।

जम्मू-कश्मीर में सरकार से समर्थन वापसी के फैसले से पहले राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने कश्मीर से बीजेपी खेमे के मंत्रियों और नेताओं को वापस दिल्ली बैठक के लिए बुलाया था। तभी इस बात की आशंका व्यक्त की गई थी कि एक-दो दिनों में बीजेपी कश्मीर मसले पर कोई बड़ा फैसला ले सकती है।

इस घटनाक्रम के पीछे तीन मुख्य वजह हो सकते हैं जो इस प्रकार हैं-

  • पहला बड़ा कारण तो यह है कि जिस पीडीपी सरकार के आग्रह के आधार पर केंद्र की मोदी सरकार ने रमजान के दौरान एक माह के लिए संघर्षविराम की शर्त मानी थी, उस पूरे समयकाल में मुफ्ती सरकार राज्य में कानून-व्यववस्था बहाल करने में नाकाम रही और आतंकी गुटों ने अपनी पोजीशन और मजबूत कर ली। अजीत डोवाल ने पीएम मोदी और बीजेपी के अध्यक्ष अमित शाह को इस बारे में पुख्ता जानकारी दी है कि अगर पीडीपी से गठजोड़ बना रहा तो इस साल की अमरनाथ यात्रा में आतंकी बड़ा हमला करने की फिराक में हैं।
  • डोवाल ने साफ किया है कि इंटेलीजेंस इनपुट यही कहता है कि ऐसे किसी भी हमले का राजनीतिक नुकसान सबसे ज्यादा बीजेपी को ही होगा। एक और अहम बात यह है कि कश्मीर में सुरक्षा बलों पर पत्थरबाजी की घटनाएं नहीं रुकी हैं, बल्कि इसमें बेतहाशा बढ़ोतरी हुई है। ऐसे में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार का मानना है कि घाटी में सेना का बड़ा ऑपरेशन पीडीपी की गठबंधन सरकार में रहते हुए नहीं हो सकता, क्योंकि महबूबा घाटी के अलगाववादियों से बातचीत की जिद पर अड़ी हुई हैं।
  • रक्षा सूत्रों का मानना है कि आगामी लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार घाटी में सेना को आतंकियों के खिलाफ बड़ा ऑपरेशन चलाने की पूरी छूट दे सकती है, ताकि राष्ट्रीय सुरक्षा के मसले पर उसे राजनीतिक लाभ मिले। मुमकिन है कि केंद्र सरकार सेना को एक बार फिर सीमापार जाकर सर्जिकल स्ट्राइक करने की भी अनुमति दे।