पुष्पांजलि, फरीदाबाद। फ्रेंडशिप डे यानि दोस्ती का दिन। भारत में तो हर दिन को हर शाम दोस्तों के नाम होता है। फिर आखिर दोस्ती के दिन को ही लोग इतना महत्व क्यों देते हैं। दरअसल फ्रेंडशिप डे पश्चिमी सभ्यता की सोच और मांग है। भारत में तो प्राचीन सभ्यता से ही दोस्ती की कई मिसालें को देखने को मिलती हैं।
भगवान श्रीराम ने दोस्ती के वास्ते ही सुग्रीव की मदद की थी। भगवान श्री कृष्ण और सुदामा की दोस्ती की मिसाल तो जमाना आदि काल से देता आ रहा है। पश्चिम की तुलना भारत से करें तो दोस्ती व्यापक पैमाने पर फैली हुई है। भारतीय समाज में लोग ज्यादा घुल-मिलकर रहते हैं।
दोस्ती एक ऐसा रिश्ता है जो हम मनाते हैं। एक दोस्त दूसरे दोस्त को अपने दिल की सारी बातें कह सकता है। प्रेम विश्वास और आपसी समझदारी के इस रिश्ते को ही दोस्ती कहा जाता है। दोस्ती का रिश्ता हर रिश्ते से खास और ऊपर होता है। तभी तो कोई अजनबी कब हमारा अपना हो जाता है कि हमारे लिए कुछ भी करने को गुजर जाता है। वैसे भी तो कहते हैं न कि फ्रैंड नही तो जिंदगी में फन नहीं। हालांकि इस फन में अक्सर हम अपने दोस्त के साथ कुछ ऐसा कर बैठते हैं, जिसका बोझ हमेशा सालता रहता है।
दोस्ती का रिश्ता जात-पात, लिंग-भेद तथा देश काल की सीमाओं को नहीं जानता, पर इनके बावजूद हमारे समाज में एक लड़का और एक लड़की की दोस्ती पर प्रश्न उठाने वाले को अक्सर यह डर सताता है कि कहीं दोनो प्यार न कर बैठें, वह प्यार जिसे चाहते तो सभी हैं लेकिन जब यही प्यार कोई अपना कर लें तो समाज में खलबली उठ जाती है।
आज फ्रेंडशिप डे के दिन हम उम्मीद करते हैं कि समाज अपनी विचारधारा में बदलाव करेगा और संसार में दोस्ती की नई बयार बहेगी।








