सरकार ने मामले पर एक सर्वे रिपोर्ट मांगी
देहरादून। चारधामों में से एक बदरीनाथ धाम के मंदिर में बीते दिनों आई दरारों ने सरकार से लेकर मंदिर समिति और एएसआई को टेंशन में डाल दिया है। मंदिर के मुख्य द्वार के दाहिने ओर आई दरारों को भरने के लिए अब एएसआई अपनी तैयारी शुरू कर दी है। मगर सवाल यह खड़ा हो रहा है कि आखिरकार बदरीनाथ मंदिर में यह दरारें आई तो आई कैसे? फिलहाल सरकार ने इस पूरे मामले पर एक सर्वे रिपोर्ट मांगी है, ताकि जल्द से जल्द इन दरारों की मरम्मत करवाई जा सके।
बदरीनाथ मंदिर में दरारों के पड़ने का पता तब लगा जब सालाना मंदिर के सर्वे के लिए टीमें मंदिरों में पहुंची। इस बार भी टीम मंदिर का मुआयना कर रही थी। सर्वे कर रहे कर्मचारियों ने मुख्य द्वार के पास सिंह द्वार के नीचे पिलर में दरारों को देखा। जब इसकी जांच की गई तो मालूम हुआ कि यह दरार एक पिलर से होते हुए ऊपर मुख्य द्वार तक जा रही है। बदरीनाथ धाम में दरारें आने की जानकारी जैसे ही मंदिर समिति को मिली वैसे ही वो भी हरकत में आ गई। मंदिर समिति का कहना है फिलहाल एएसआई ने जो जांच की है, उसमें मंदिर को किसी तरह का खतरा न होने की बात कही गई है। मामले में एएसआई को जल्द से जल्द कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
उत्तराखंड की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए इस बात पर भी गौर किया जा रहा है कि कहीं उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग और चमोली के आसपास इलाकों में आए भूकंप तो इस दरार की वजह नहीं हैं। प्रथम दृष्टया जो जांच में निकल कर सामने आया है वह यह बताता है कि जिस जगह दरारें आई हैं उस जगह पर जमीन बेहिसाब है। ऐसे में उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्यों में बने मंदिर हो या बड़ी इमारतें अमूमन नीचे की तरफ धंसती हैं तो दरारें आ जाती हैं। लिहाजा अब इन पूरी दरारों को भरने के लिए शासन को पत्र लिखा गया है।









