अफसर और क्रिमनलों की यारी कुचलेंगे धामी

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सीएम को नहीं पसंद खाकी पर कोई दाग

देहरादून। मुख्यमंत्री को अपराधियों के नाम से ही बडी नफरत है और उन्होंने अपने चार साल के कार्यकाल में हर बार हर मंच से यही दहाड लगाई है कि अगर किसी अपराधी ने उत्तराखण्ड के अन्दर अपराध करने का दुसाहस किया तो उसे वो सबक सिखाया जायेगा जिसकी उसने कभी कल्पना भी नहीं की होगी। मुख्यमंत्री ने अपने शासनकाल में अपराधियों के खिलाफ एक बडा युद्ध शुरू करके यह संदेश दे दिया था कि वह अपने राज्य में एक भी अपराधी को नहीं पनपने देंगे। मुख्यमंत्री के शासनकाल में कुख्यातों और अपराधियों पर जो प्रहार पुलिस ने शुरू कर रखा है उससे अपराधजगत में हाहाकार मचा हुआ है। 2025 तक उत्तराखण्ड को अपराधमुक्त करने का संकल्प लेने वाले मुख्यमंत्री के विजन पर पुलिस के एक बडे अफसर ने उस समय ग्रहण लगा दिया जब उसने कुख्यात अपराधियों से खामोशी के साथ यारी निभाने का सिलसिला शुरू किया लेकिन यह सिलसिला कुछ समय के भीतर ही एसटीएफ ने बेनकाब करके रख दिया और सबसे अह्म बात यह है कि पुलिस अफसर ने उस कुख्यात गैंग से अपनी यारी निभाई जो उत्तराखण्ड के अन्दर दहशत फैलाता रहा है। जमीनों पर कब्जे करने का जो शातिराना खेल कुख्यात गैंग खेल रहा है उस गैंग को पुलिस अफसर ने अगर अपनी शरण में रखा हुआ है तो यह उत्तराखण्ड के बेदाग मुख्यमंत्री के लिए एक बडा ंिचता का विषय है। अब हर तरफ एक ही आवाज सुनने को मिल रही है कि अफसर और क्रिमनलों की यारी को जल्द मुख्यमंत्री कुचल डालेंेगे क्योंकि मुख्यमंत्री को खाकी पर दाग कभी भी पसंद नहीं है और वह इस पूरे मामले में जो एक्शन लेंगे उस पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।
उत्तराखण्ड बनने के बाद से ही राज्य के अन्दर अपराधियों, माफियाओं और जमीनों पर कब्जा करने वाले भूमाफियाओं ने अपना एक बडा साम्राज्य खडा करने का जो दौर शुरू किया था वह उत्तराखण्डवासियों के मन में हमेशा एक बडा डर पैदा करता रहा और उसी के चलते अधिकांश पूर्व मुख्यमंत्री राज्य के अन्दर अपराधियों और माफियाओं के नेटवर्क को नेस्तनाबूत करने का दावा तो करते रहे लेकिन वह उन पर प्रहार करने के लिए कभी भी आगे बढे हों ऐसा देखने को नहीं मिला। उत्तराखण्ड के अन्दर एक दशक तक बाहरी राज्यों के अपराधियों, माफियाओं का दबदबा देखने को मिलता रहा और कुछ बाहरी राज्यों के अपराधी भी उत्तराखण्ड को अपनी शरण स्थली बनाने से कभी पीछे नहीं हटे जिससे उत्तराखण्ड में रहने वाले लोगों के मन में ऐसे अपराधियों को लेकर जो बडा डर देखने को मिलता था उसे राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सत्ता संभालते ही भांप लिया था। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सरकार संभालते ही राज्य के अन्दर अपराधियों का संहार करने के लिए सभी जनपदों के पुलिस कप्तानों को खुला संदेश दिया था और राज्य के पूर्व डीजीपी अभिनव कुमार ने तो अपराधियों को खुली चुनौती दी थी कि उन्होंने राज्य के अन्दर अपराध करने का दुसाहस किया तो उन्हें इसका खामियाजा भुगतना पडेगा तो वहीं उन्हांेनेे जेलों में बंद अपराधियों को दो टूक चेतावनी दी थी कि अगर उन्होंने जेल के अन्दर से गैंग चलाने का सपना भी देखा तो उनके सपने को चूरचूर कर दिया जायेगा। अभिनव कुमार ने अपने शासनकाल में दो कुख्यात अपराधियों को मुठभेड में ढेर कराया और अनगिनत बदमाशों की पुलिस से हुई मुठभेड में वह गोलियां लगने से जब तडफने लगे तो उन्होंने उत्तराखण्ड के अन्दर अपराध न करने की खुली सौंगध खाई थी।
मुख्यमंत्री अपनी हर बैठक में कानून व्यवस्था को चुस्त-दुस्त करने का खाका बनाते हैं और राज्य के अन्दर अपराधियों की नाक में नकेल डालने का वह हमेशा हुक्म देते आ रहे हैं लेकिन गजब की बात यह है कि मुख्यमंत्री के अपराधमुक्त उत्तराखण्ड के विजन पर ग्रहण लगाने के लिए पुलिस का एक अधिकारी एक कुख्यात गैंग से ही यारी निभाता हुआ आगे बढ चला और इस यारी की सारी पोल उस समय खुल गई जब एसटीएफ ने दो बदमाशों को अपनी गिरफ्त में लिया। पुलिस का अफसर कैसे अपराधियों के साथ यारी निभाता हुआ चला गया यह काफी हैरान करने जैसा ही दिखाई देता है और इस अफसर ने आखिरकार किसकी शह पर बेखौफपन में कुख्यात गैंग से यारी निभाने में कोई परहेज नहीं किया यह भी एक सोचनीय विषय है? हालांकि माना जा रहा है कि दबंग मुख्यमंत्री पुलिस अफसर और क्रिमनलों के बीच चली आ रही यारी को कुचल कर रख देंगे।