देहरादून स्थित ऐतिहासिक गोरखा मिलिट्री इंटर कॉलेज अपनी स्थापना के 100 वर्ष पूरे करने जा रहा है। इस अवसर पर स्कूल के पूर्व राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल खिलाड़ियों ने संस्थान की विरासत को सुरक्षित रखने की पहल की है। स्कूल के 65 पूर्व खिलाड़ियों एवं एलुमनाइ ने मिलकर 56,890 रुपये का योगदान स्कूल प्रबंधन को सौंपा है,यह सहयोग शताब्दी समारोह और स्कूल के विकास कार्यों के लिए दिया गया है।
गोरखा स्कूल की स्थापना वर्ष 1925 में ब्रिटिश शासन के दौरान गोरखा रेजिमेंट के बच्चों की शिक्षा और खेल विकास के उद्देश्य से की गई थी। एक समय ऐसा भी था जब इस विद्यालय में पाँच से छह हजार छात्र दो शिफ्टों में अध्ययन करते थे,फुटबॉल इस संस्थान की पहचान रहा है और यहां से कई उत्कृष्ट खिलाड़ी देश को मिले। स्कूल के अधिकतम खिलाड़ियों ने गोरखा ब्रिगेड टीम से खेलकर डुरंड कप दो बार जीता है,वंही वर्ष 1964 व 1965 में सब्रतो मुखर्जी अंतर्राष्ट्रीय फुटबॉल टूर्नामेंट जीतकर पहचान बनाई। श्याम थापा, सी.बी. थापा, अमर बहादुर गुरुंग, भूपेंद्र रावत सहित अनेक राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों ने यहां से खेलते हुए भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व किया।
वर्तमान में विद्यालय की भूमि लीज समाप्त होने के बाद मामला न्यायालय में विचाराधीन है। इस दौरान पूर्व खिलाड़ियों एवं स्थानीय खेल प्रेमियों ने सरकार से इस ऐतिहासिक धरोहर को संरक्षित रखने की मांग की है। पूर्व अंतरराष्ट्रीय कोच और खिलाड़ी डॉ. वीरेंद्र सिंह रावत ने कहा कि, “गोरखा स्कूल केवल शिक्षा संस्थान नहीं, बल्कि खेल संस्कृति का गौरव है,इसकी पहचान और सम्मान को आगे भी जीवित रखना आवश्यक है।”
15 और 16 नवंबर को विद्यालय प्रबंधन द्वारा शताब्दी समारोह, सांस्कृतिक कार्यक्रम और पूर्व खिलाड़ियों के सम्मान कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा।
सुबह नियमित अभ्यास करने आने वाले 30 से 70 वर्ष आयु वर्ग के खिलाड़ियों ने सामूहिक रूप से सहयोग राशि सौंपकर यह संदेश दिया कि उत्तराखंड के खिलाड़ी इस विरासत को बचाने के लिए हमेशा तैयार हैं।
प्रबंधन समिति से ब्रिगेडियर पूरन सिंह गुरुंग, प्राचार्या दीपाली जुगरान, प्रबंधक एल.बी.गुरुंग,अध्यक्ष डी.बी. थापा और प्रधान लिपिक विनोद प्रसाद शर्मा ने सभी सहयोगकर्ताओं का आभार व्यक्त किया।










