पितृ पक्ष में श्रीमद्भागवत कथा का दिव्य संदेश,माता-पिता एवं पूर्वजों का सम्मान ही सच्ची श्रद्धा,आध्यात्मिक गुरु रमेश सेमवाल जी महाराज

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रुड़की। ज्योतिष गुरुकुलम नवग्रह पीठ,पुरानी तहसील रुड़की में पितृ पक्ष के पावन अवसर पर आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिवस श्रद्धालुओं ने आध्यात्मिक गुरु आचार्य रमेश सेमवाल जी महाराज के श्रीमुख से भागवत कथा का श्रवण किया। कथा के दौरान पूरा वातावरण भक्तिमय एवं आध्यात्मिक ऊर्जा से ओत-प्रोत रहा।आध्यात्मिक गुरु रमेश सेमवाल जी महाराज ने श्रीमद्भागवत कथा की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि पितृ पक्ष अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा,कृतज्ञता और स्मरण का पर्व है।मनुष्य को अपने माता-पिता तथा पूर्वजों के प्रति सदैव सम्मान और सेवा का भाव रखना चाहिए।माता-पिता की सेवा और उनका आशीर्वाद जीवन की सबसे बड़ी संपत्ति है।उन्होंने बच्चों और युवा पीढ़ी को संदेश देते हुए कहा कि आधुनिक जीवन की व्यस्तता में हमें अपने संस्कारों और पारिवारिक मूल्यों को नहीं भूलना चाहिए,जिस परिवार में माता-पिता का सम्मान होता है,वहां संस्कार, प्रेम और सद्भाव बना रहता है।अपने पूर्वजों का स्मरण केवल पितृ पक्ष तक सीमित न रहकर पूरे जीवन श्रद्धा के साथ किया जाना चाहिए। आचार्य रमेश सेमवाल जी महाराज ने श्रीमद्भागवत कथा की महिमा बताते हुए कहा कि भागवत कथा मनुष्य को भक्ति,सदाचार,धर्म और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है।सनातन परंपरा में पितृ पक्ष के दौरान भगवान की कथा,श्रवण,दान-पुण्य, गौसेवा एवं जरूरतमंदों की सेवा को विशेष आध्यात्मिक महत्व दिया गया है।श्रद्धा और भक्ति के साथ भागवत कथा का श्रवण करने से पितरों की शांति और सद्गति के लिए पुण्यकारी फल की प्राप्ति मानी जाती है।उन्होंने कहा कि भागवत कथा केवल सुनने का विषय नहीं,बल्कि जीवन में उतारने का संदेश है। कथा हमें अहंकार त्यागने,माता-पिता की सेवा करने,सत्य के मार्ग पर चलने,जीवों के प्रति दया रखने और भगवान के प्रति भक्ति भाव रखने की प्रेरणा देती है।कथा के दौरान श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव से भगवान श्रीकृष्ण की महिमा का श्रवण किया और कथा व्यास आध्यात्मिक गुरु आचार्य रमेश सेमवाल जी महाराज के प्रवचनों से आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त किया।कथा में राधा भटनागर,चित्रा गोयल,सुलक्षणा सेमवाल ,भारतीय गुप्ता,परीक्षा,सीमा वर्मा,रितु वर्मा,कमलेश व सचिन आदि प्रमुख रूप से मौजूद रहे।