

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने स्वयं सेवकों को वह 6 मूल मंत्र हमेशा अपने परिवार में उतारने की अपील की
नैनीताल (हरिशंकर सैनी ) हल्द्वानी में आरएसएस द्वारा परिवार प्रबोधन कार्यक्रम आयोजित किया गया जिसमें संघ प्रमुख श्रीमान मोहन भागवत जी ने अपने विचार रखे।उन्होंने कहा कि अपने घर के अंदर महात्मा गांधी, भगत सिंह, डॉ. आंबेडकर, वीर सावरकर आदि के चित्र लगाने चाहिए। घर पर वेलकम शब्द क्यों? सुस्वागत क्यों नहीं होना चाहिए।

इसअवसर पर आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि समाज कुटुंब के आधार पर चलता है। एक दूसरे की निर्भरता को मानकर चलेंगे तो ही समाज ठीक से चल सकेगा। समाज में किसके साथ क्या व्यवहार करना है यह कुटुंब सिखाता है। जैसे घर में हमारी माता है वैसे ही ये सृष्टि भी हमारी माता है।

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रमुख सरसंघचालक मोहन भागवत का परिवार प्रबोधन समाज की विकृतियों को दूर करने के लिए मील का पत्थर साबित होगा। हल्द्वानी में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने 6 मूल मंत्र देकर समाज को एक कुटुंब में बांधने की स्वयं सेवकों से अपील की है।

भागवत ने कहा भारत देश की संस्कृति, परंपराओं और कुटुंब भावना से देश विश्व गुरु बन सकता है। आज दूसरे देश के शोधकर्ता भारत के परिवारों की एकता और कुटुंब निर्माण पर शोध कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि पहले प्रतिष्ठा कमाने की नही बांटने की थी परंतु वर्तमान में ऐसा नहीं है। हमको पूरी तरह मानवता के साथ रहना है। परिवार एक घर का समूह नही है। कहा कि बच्चों को बाहर जाने से न रोके बल्कि उसे वहां कैसे रहना है यह सिखाएं।
राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रमुख सरसंघचालक मोहन भागवत का परिवार प्रबोधन समाज की विकृतियों को दूर करने के लिए मील का पत्थर साबित होगा। हल्द्वानी में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने 6 मूल मंत्र देकर समाज को एक कुटुंब में बांधने की स्वयं सेवकों से अपील की है।

भागवत ने कहा भारत देश की संस्कृति, परंपराओं और कुटुंब भावना से देश विश्व गुरु बन सकता है। आज दूसरे देश के शोधकर्ता भारत के परिवारों की एकता और कुटुंब निर्माण पर शोध कर रहे हैं। इसलिए भारतीयों की जिम्मेदारी काफी ज्यादा बढ़ गई हैं कि विदेशी अब हमारी संस्कृति और संस्कारों पर अध्ययन कर रहे हैं।

आरएसएस के 6 मूल मंत्र
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने स्वयं सेवकों को वह 6 मूल मंत्र हमेशा अपने परिवार में उतारने की अपील की है जिस मंत्र के जरिए देश निर्माण का स्वास्थ्य निर्माण हो सकता है।
1 भाषा: भागवत ने कहा कि विश्व को जानने के लिए भले ही वह दूसरी भाषा बोले लेकिन जब घर य अपने समाज में बैठे तो हमेशा अपनी भाषा को ही बोले जैसे हमारी हिंदी भाषा य अपनी कोई क्षेत्रीय भाषा।
2 भूषा: भागवत ने कहा बाहर जाते समय य फिर अपने कार्यालय जाते समय जिस भी वेशभूषा की आवश्यकता हो वोह जरूर पहने लेकिन अपने तीज त्यौहार, पर्व पर अपनी परंपरागत भूषा पहनना चाहिये जिससे वह अपनी परंपरा को जीवित रखकर अपने बच्चा को बता सके।
3 भजन: भागवत ने कहा कि भले ही वह घर से बाहर निकलकर अपनी आवश्यकता के अनुसार कोई गीत गाये लेकिन कोई अपनी परंपरा की भजन गाना नहीं भूलना चाहिये, जो संस्कृति पर आधारित होना चाहिए।
4 भोजन: हर दिन एक जैसा भोजन कोई नहीं खा सकता है। लेकिन हमेशा अपनी संस्कृति से जुड़े भोजन को खाना बिल्कुल भी न भूले क्योंकि वह भोजन उनके पर्यावरण और उस क्षेत्र के अनुसार होता है। उन्होंने कहा आज 800 प्रकार का भोजन भारत में हैं।
5 भ्रमण : स्वयं सेवकों को विदेश पेरिस, न्यूयॉर्क देख रहे हैं तो वह काशी , वनारस, चितौड़ को देखना न भूले जिससे उनको भारतीयों की शौर्य गाथाएं भी मिलेंगी।
6 भवन: अपने घर को अच्छे से सजाएं अच्छी अच्छी चीजें लाये लेकिन एक बार गरीब के घर पर भी जाए। और वेलकम के स्थान पर सुस्वागतम लिखे। राजगुरु चंद्रशेखर आजाद के चित्र लगाए।
श्री मोहन भागवत जी अपने प्रवास के तीसरे दिन आज सोमवार को संघ प्रमुख मोहन भागवत पूरे प्रांत के लगभग सवा सौ प्रचारकों के साथ बैठक करेंगे। इसके अलावा उनके तीन दिन के हल्द्वानी प्रवास के दौरान व्यवस्था में लगे लोगों के साथ परिचर्चा का कार्यक्रम भी रखा गया है।









