राष्ट्र निर्माण में युवा बनें अग्रणी : डॉ. शैलेन्द्र जी
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत प्रचारक ने युवाओं को किया आह्वान, कहा – युवा केवल दर्शक नहीं, परिवर्तन के वाहक हैं
देहरादून। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत प्रचारक डॉ. शैलेन्द्र जी ने पटेल नगर स्थित श्री गुरु राम राय मैदान में आयोजित कार्यक्रम में दक्षिण महानगर के सैकड़ों युवा स्वयंसेवकों को संबोधित करते हुए राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि संघ के शताब्दी वर्ष में युवाओं को अपनी ऊर्जा, समय और क्षमता को समाज तथा राष्ट्र के उत्थान के कार्यों में समर्पित करना चाहिए।
“युवा केवल दर्शक नहीं, परिवर्तन के वाहक हैं”
अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में डॉ. शैलेन्द्र जी ने कहा कि आज का युवा केवल दर्शक नहीं, बल्कि परिवर्तन का वाहक है। देश के हर कोने में युवा स्वयंसेवक राष्ट्र निर्माण के कार्यों में जुटे हैं — यही भारत की वास्तविक शक्ति है।
उन्होंने कहा कि संघ के शताब्दी वर्ष में विभिन्न आयु वर्गों के स्वयंसेवक पूर्ण गणवेश में नियमित शाखाओं में भाग लेकर, संगठन की भावना को सशक्त बना रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि इस वर्ष देशभर में हजारों शाखाओं में शताब्दी वर्ष के विशेष कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है, जिनमें युवाओं की सक्रिय भागीदारी उत्साहजनक है।
“सेवा और सहयोग में सदैव अग्रणी हैं स्वयंसेवक”
प्रांत प्रचारक ने कहा कि संघ का स्वयंसेवक हर परिस्थिति में सेवा के लिए तत्पर रहता है। चाहे प्राकृतिक आपदाएँ हों या कोई दुर्घटना — संघ के स्वयंसेवक निस्वार्थ भाव से समाज की सेवा में जुट जाते हैं।
उन्होंने कहा कि यह सेवा-भावना ही संघ की पहचान है और यही भावना युवा पीढ़ी को राष्ट्र के प्रति समर्पण का पाठ पढ़ाती है।
“लोकतंत्र में युवाओं की आस्था भारत की स्थिरता की नींव”
डॉ. शैलेन्द्र जी ने कहा कि भारत के युवा अपने देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था में अटूट विश्वास रखते हैं। पड़ोसी देशों में राजनीतिक अस्थिरता के बावजूद, भारतीय युवाओं का यह विश्वास विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र को और अधिक मजबूत बना रहा है।
उन्होंने कहा कि युवाओं की यह आस्था और सजगता ही भारत की स्थिरता और प्रगति का मूल आधार है।
“सीमाओं पर भी सक्रिय हैं संघ के स्वयंसेवक”
प्रांत प्रचारक ने बताया कि देश के युवा केवल समाज में समरसता और सद्भाव का संदेश ही नहीं दे रहे, बल्कि सीमाओं की सुरक्षा में भी अप्रत्यक्ष रूप से योगदान दे रहे हैं।
उन्होंने कहा कि असम और अन्य सीमावर्ती राज्यों में जहाँ भौगोलिक और जनसंख्या संबंधी परिवर्तन के प्रयास हो रहे हैं, वहाँ संघ के स्वयंसेवक सतर्कता और संगठन शक्ति से स्थिति को सुदृढ़ बनाए हुए हैं।
उन्होंने गर्वपूर्वक बताया कि संघ की शाखाएँ आज मुनस्यारी, धारचूला जैसे दुर्गम सीमावर्ती गाँवों में भी संचालित हैं। साथ ही बद्रीनाथ-केदारनाथ जैसे तीर्थ क्षेत्रों में शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों का आयोजन संघ की व्यापक पहुंच और सेवा भाव को प्रदर्शित करता है।
“विखंडन की प्रवृत्तियों को रोकें युवा”
अपने संबोधन के अंत में डॉ. शैलेन्द्र जी ने युवाओं से आह्वान किया कि वे समाज में फैले विखंडन, विभाजन और वैमनस्य की प्रवृत्तियों को रोकने में अग्रणी भूमिका निभाएँ।
उन्होंने कहा —
“युवाओं की एकता और सजगता ही भारत के उज्ज्वल भविष्य की गारंटी है। यदि युवा संगठित और अनुशासित रहेंगे, तो कोई भी शक्ति भारत की प्रगति को रोक नहीं सकती।”
कार्यक्रम में अनेक गणमान्य उपस्थित
इस अवसर पर प्रांत सह डिग्री विद्यार्थी प्रमुख श्रीमान आनंद जी, दक्षिण महानगर संघ चालक कैलाश मैलाना जी, विभाग सह प्रचारक सौरभ जी, विभाग कार्यवाह रविन्द्र चौहान जी, महानगर कार्यवाह सतेंद्र जी, महानगर सह कार्यवाह शंकर जी, महानगर विद्यार्थी प्रचारक देवराज जी, महानगर प्रचार प्रमुख मनीष बागड़ी जी सहित दक्षिण महानगर की शारीरिक टोली, वरिष्ठ स्वयंसेवक एवं सैकड़ों युवा कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
संपूर्ण कार्यक्रम में अनुशासन, एकता और देशभक्ति का उत्कृष्ट प्रदर्शन देखने को मिला। उपस्थित स्वयंसेवकों ने राष्ट्र निर्माण, सेवा और संगठन के मार्ग पर निरंतर अग्रसर रहने का संकल्प लिया।








