उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय में 15 दिवसीय इंडक्शन प्रोग्राम प्रारंभ, छात्रों को दिलाई गई नशा मुक्ति की शपथ

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हर्रावाला (देहरादून) । उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय, मुख्य परिसर हर्रावाला, देहरादून में बीएएमएस नवप्रवेशित विद्यार्थियों बैच 2025-26 हेतु भारत सरकार के एनसीआईएसएम द्वारा निर्देशित ट्रांजिशनल करिकुलम कार्यक्रम “आर्युप्रवेशिका” का आज विधिवत शुभारंभ किया गया। उद्घाटन कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर अरुण कुमार त्रिपाठी ने की। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित विद्वान वक्ता प्रोफेसर हरिमोहन चंदोला, पूर्व निदेशक, चौधरी ब्रह्मप्रकाश चरक आयुर्वेद संस्थान, नई दिल्ली उपस्थित रहे। प्रातः विश्वविद्यालय के मा०कुलपति , मुख्य अतिथि एवं मुख्य परिसर के निदेशक एवं डीन प्रो. (डॉ.) पंकज कुमार शर्मा ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर धनवंतरी वंदना के साथ कार्यक्रम का आरंभ किया।उद्घाटन सत्र में कुलपति प्रो. अरुण कुमार त्रिपाठी ने अपने उद्बोधन में कहा कि आयुर्वेद जीवन का विज्ञान है और वर्तमान समय में संपूर्ण विश्व में आयुर्वेद की स्वीकार्यता और उपयोगिता तेजी से बढ़ रही है। उन्होंने बताया कि प्राकृतिक आहार-विहार, औषधि पद्धति, शोधन प्रक्रियाओं और आयुर्वेद में वर्णित आदर्श जीवन शैली, इसकी निरपट औषधिओ के कारण आयुर्वेद वैश्विक स्तर पर लोकप्रिय हो रहा है। प्रो.अरुण कुमार त्रिपाठी ने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे आयुर्वेद को केवल एक पाठ्यक्रम न मानकर इसे एक सेवापरक और संभावनाओं से भरे करियर के रूप में अपने व्यक्तित्व का विकास करें । मुख्य अतिथि प्रो. हरिमोहन चंदोला ने आयुर्वेद के प्राचीन पंचमहाभूत्र दोस्त निर्गुण सिद्धांतों, आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण, चिकित्सा की मूल अवधारणाओं एवं योग एवं आयुर्वेद के महत्व को प्रतिपादित किया। तथा एक उत्तम चिकित्सक बनने हेतु आवश्यक गुणों पर विस्तार से अपनी बात रखी। उन्होंने विद्यार्थियों को आयुर्वेद को व्यवहार में उतारने, शोध में आगे बढ़ने और रोगियों की सेवा में समर्पित रहने की प्रेरणा दी। मुख्य परिसर के निदेशक एवं डीन प्रो. (डॉ.) पंकज कुमार शर्मा ने ट्रांजिशनल करिकुलम की संकल्पना, आवश्यकता और 15 दिवसीय इंडक्शन प्रोग्राम की शैक्षणिक उपयोगिता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद केवल एक प्रोफेशन नहीं बल्कि मानवता की सेवा का माध्यम है। अष्टांग आयुर्वेद के सम्यक अध्ययन से विद्यार्थी चिकित्सा, शोध, औषध निर्माण, डिजिटल हेल्थकेयर तथा संबंधित क्षेत्रों में उत्कृष्ट अवसर प्राप्त कर सकते हैं। इस कार्यक्रम में वाइट कोट सेरेमनी के अंतर्गत विश्वविद्यालय के कुलपति एवं मुख्य अतिथि प्रश्न निदेशक द्वारा संयुक्त रूप से विद्यार्थियों को व्हाइट कोट(एप्रोन) प्रदान किया गया। तथा उत्तराखंड सरकार द्वारा चलाए जा रहे नशा मुक्ति देवभूमि अभियान के 5 वर्ष पूर्ण होने पर बच्चों को नशा मुक्ति के लिए भी जगरूप किया गया। तथा विद्यार्थियों ने नशा मुक्ति के लिए शपथ भी दिलाई गई।कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ. राजीव कुरेले शैक्षणिकअधीक्षक, नोडल ऑफिसर नशा मुक्त देवभूमि अभियान द्वारा किया गया। कार्यक्रम में डॉ. नंदकिशोर दाधीच, डॉ. अमित तमादड्डी , शैक्षणिक अधीक्षक, विश्वविद्यालय नोडल ऑफिसर नशा मुक्ति अभियान, हरिश्चंद्र गुप्ता प्रशासनिक अधिकारी, डॉ. एस.पी. सिंह, डॉ. जया सकलानी, डॉ. मन्नत मारवाह, डॉ. अर्चना सिंह, डॉ. उषा राणा, डॉ. रिचा शर्मा, डॉ. आकांक्षा गुप्ता, शैलेश सेमवाल, आशुतोष गैरोला, दीवान सिंह, डॉ. प्रदीप सेमवाल सहित मुख्य परिसर के सभी शिक्षक एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

नवप्रवेशित विद्यार्थियों ने अत्यंत उत्साह के साथ कार्यक्रम में भाग लिया और आयुर्वेदिक शिक्षा की इस नई एवं महत्वपूर्ण यात्रा की शुरुआत की।