विशेष साक्षात्कार – शराब नहीं, किताब से सामाजिक बदलाव की पहल
शिक्षा को सामाजिक बदलाव का सबसे सशक्त माध्यम मानने वाले जितेन्द्र यादव आज केवल एक शिक्षाविद् ही नहीं, बल्कि वैचारिक सामाजिक आंदोलन के प्रतीक के रूप में उभर रहे हैं। डी.डी. कॉलेज एवं डी.डी. पब्लिक स्कूल, देहरादून के चेयरमेन के रूप में उन्होंने वर्षों तक शिक्षा के क्षेत्र में काम करते हुए समाज की जमीनी हकीकत को करीब से देखा और समझा। मूल रूप से बाखरपुर, बालैनी (जनपद बागपत, उत्तर प्रदेश) निवासी जितेन्द्र यादव अब ब्लॉक पिलाना से अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत कर रहे हैं, जहां वे “शराब नहीं, किताब” जैसे स्पष्ट और प्रभावशाली संदेश के साथ नशामुक्त, शिक्षित और सशक्त समाज की कल्पना को आगे बढ़ा रहे हैं।
इस विशेष साक्षात्कार में उन्होंने राजनीति में प्रवेश के कारणों से लेकर शिक्षा, युवाओं, महिलाओं, किसानों और सामाजिक सुधारों पर अपने विचार खुलकर साझा किए हैं। जितेन्द्र यादव अब ब्लॉक पिलाना से अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत कर रहे हैं। प्रस्तुत हैं उनसे हुई विशेष बातचीत के प्रमुख अंश—
प्रश्न : राजनीति में प्रवेश करने का निर्णय आपने क्यों लिया?
उत्तर: मैं लंबे समय से शिक्षा और सामाजिक क्षेत्र में कार्य कर रहा हूं। इस दौरान यह महसूस किया कि समाज की कई समस्याएं ऐसी हैं, जिनका समाधान केवल सामाजिक प्रयासों से नहीं, बल्कि नीति और व्यवस्था के स्तर पर होना आवश्यक है। राजनीति में आने का उद्देश्य सत्ता नहीं, बल्कि व्यवस्था में सुधार और समाज सेवा है।
प्रश्न : ‘शराब नहीं, किताब’ का संदेश क्या है?
उत्तर: यह संदेश समाज को सही दिशा देने का आह्वान है। शराब परिवार, स्वास्थ्य और भविष्य को नुकसान पहुंचाती है, जबकि किताब ज्ञान, संस्कार और प्रगति का मार्ग खोलती है। मेरा मानना है कि यदि संसाधनों का उपयोग शिक्षा में हो, तो समाज स्वतः मजबूत होगा।
प्रश्न : शिक्षा के क्षेत्र में आपका अनुभव राजनीति में कैसे सहायक होगा?
उत्तर: शिक्षा के क्षेत्र में काम करते हुए मैंने जमीनी सच्चाइयों को करीब से देखा है—गरीबी, संसाधनों की कमी और मार्गदर्शन का अभाव। यह अनुभव मुझे नीतिगत निर्णय लेने में व्यावहारिक और संवेदनशील बनाएगा।
प्रश्न : आपने ब्लॉक पिलाना को ही अपनी राजनीतिक शुरुआत के लिए क्यों चुना?
उत्तर: पिलाना मेरी कर्मभूमि है। यहां की सामाजिक और आर्थिक समस्याओं से मैं भली-भांति परिचित हूं। मेरा मानना है कि बदलाव की शुरुआत जमीन से होनी चाहिए, ताकि जनता का भरोसा मजबूत हो।
प्रश्न : क्षेत्र की सबसे बड़ी समस्या आप किसे मानते हैं?
उत्तर: नशाखोरी, बेरोजगारी और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की कमी सबसे बड़ी चुनौतियां हैं। इन तीनों समस्याओं का आपस में गहरा संबंध है और इन्हें एक साथ सुलझाने की आवश्यकता है।
प्रश्न : युवाओं के लिए आपकी प्राथमिक योजनाएं क्या होंगी?
उत्तर: युवाओं को शिक्षा के साथ-साथ कौशल विकास और रोजगार से जोड़ना मेरी प्राथमिकता होगी। उन्हें नशे से दूर रखकर सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ाना जरूरी है।
प्रश्न : ग्रामीण शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए क्या कदम जरूरी हैं?
उत्तर: ग्रामीण क्षेत्रों में अच्छे शिक्षक, डिजिटल सुविधाएं और छात्रवृत्ति योजनाएं जरूरी हैं। शिक्षा को रोजगार से जोड़ना भी समय की मांग है।
प्रश्न : महिलाओं के सशक्तिकरण को आप कैसे देखते हैं?
उत्तर: महिलाओं का सशक्त होना ही समाज की असली प्रगति है। शिक्षा, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता के बिना महिला सशक्तिकरण संभव नहीं है।
प्रश्न : किसानों की समस्याओं को लेकर आपकी क्या सोच है?
उत्तर: किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य, आधुनिक तकनीक और समय पर सहायता मिलनी चाहिए। किसान मजबूत होगा, तभी देश मजबूत होगा।
प्रश्न : क्या नशामुक्त समाज वास्तव में संभव है?
उत्तर: यह कठिन जरूर है, लेकिन असंभव नहीं। शिक्षा, जनजागरूकता और सख्त नीति के माध्यम से नशामुक्त समाज की दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है।
प्रश्न : शिक्षा और राजनीति के मेल को आप कैसे देखते हैं?
उत्तर: शिक्षा राजनीति को नैतिकता देती है और राजनीति शिक्षा को संसाधन। दोनों का संतुलन समाज के लिए अत्यंत आवश्यक है।
प्रश्न : यदि जनता ने अवसर दिया तो आपकी पहली प्राथमिकता क्या होगी?
उत्तर: नशा नियंत्रण, शिक्षा सुधार और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर सृजित करना मेरी पहली प्राथमिकता होगी।
प्रश्न : पारदर्शिता और ईमानदारी को लेकर आपका क्या दृष्टिकोण है?
उत्तर: जनता का विश्वास ही सबसे बड़ी पूंजी है। पारदर्शी और जवाबदेह व्यवस्था के बिना लोकतंत्र मजबूत नहीं हो सकता।
प्रश्न : आपकी राजनीति किन मूल्यों पर आधारित होगी?
उत्तर: मेरी राजनीति सेवा, शिक्षा, ईमानदारी और सामाजिक समरसता पर आधारित होगी। किसी एक वर्ग के लिए नहीं, बल्कि सर्व समाज के लिए कार्य करना लक्ष्य है।
प्रश्न : अंत में क्षेत्र की जनता के लिए आपका संदेश?
उत्तर: मैं जनता से यही कहना चाहता हूं कि वे नशे और नकारात्मकता से दूर रहकर अपने बच्चों के भविष्य में निवेश करें।
“शराब नहीं, किताब” केवल नारा नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ी को सुरक्षित और सशक्त बनाने का संकल्प है।










