ग्वालियर जिले की डबरा तहसील के ग्राम सुल्तानपुर के प्रगतिशील कृषक श्री राम अवतार पालिया जिले के अन्य किसानो के लिये उदाहरण बन गए हैं। उन्होंने पराली प्रबंधन तकनीक और सरकार की योजनाओं के तहत प्राप्त उन्नत बीजों का उपयोग कर अपनी खेती को अधिक लाभकारी बना लिया है। सुपर सीडर के माध्यम से सीधे बुवाई करने से पराली जलाने की समस्या समाप्त हुई। साथ ही समय पर बोवनी भी हो गई और जुताई पर होने वाला लगभग 3500 रुपए का खर्चा भी उन्होंने बचा लिया।
रामअवतार बताते हैं कि जब हम पराली प्रबंधन के लिये आगे आए तो कृषि विभाग द्वारा सरकार की योजना के तहत उन्हें चने की उन्नत किस्म का बीज निःशुल्क उपलब्ध कराया गया। जिसकी बाजार कीमत लगभग 8,700 रुपए है। साथ ही कीटनाशक एवं दवाओं के लिए मुझे 1,660 रुपए की सहायता मिली। रामअवतार का कहना है कि वैज्ञानिक पद्धति और उन्नत बीज के उपयोग से पारंपरिक खेती की तुलना में हमें लगभग 3–4 क्विंटल प्रति हेक्टेयर अधिक उत्पादन मिला। चने के औसत बाजार मूल्य 5,500 रुपए प्रति क्विंटल के आधार पर मुझे अतिरिक्त उत्पादन पर लगभग 19,250 रुपए की अतिरिक्त आय प्रति हैक्टेयर प्राप्त हुई। इस प्रकार बीज लागत में बचत, जुताई खर्च की कमी, विभागीय सहायता और अतिरिक्त उत्पादन को मिलाकर श्री पालिया को एक ही फसल में लगभग 33 हजार रुपए से अधिक का अतिरिक्त प्रत्यक्ष लाभ मिला है। लागत घटने से उनकी खेती का लाभ-लागत अनुपात भी लगभग 1.8 से बढ़कर 2.3 से अधिक हो गया।
श्री राम अवतार पालिया की सफलता दर्शाती है कि पराली प्रबंधन तकनीक और उन्नत बीजों का उपयोग न केवल पर्यावरण संरक्षण में सहायक है, बल्कि कम लागत में अधिक उत्पादन और आय का प्रभावी माध्यम भी है। यह मॉडल क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए प्रेरणादायक साबित हो रहा है। रामअवतार कहते हैं कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मौजूदा साल को किसान कल्याण वर्ष घोषित किया है। इससे हम जैसे किसानों के समृद्धि के द्वार खुलेंगे।









