हर्रावाला (देहरादून), 23 सितंबर। उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय के आयुर्वेद संकाय, मुख्य परिसर हर्रावाला में बुधवार को राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस-2026 का भव्य आयोजन किया गया। इस वर्ष राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस की थीम “Ayurveda for Healthier Tomorrow” (स्वस्थ भविष्य के लिए आयुर्वेद) रही। कार्यक्रम में बीएएमएस बैच 2022, 2023, 2024 एवं 2025 के विद्यार्थियों के साथ विश्वविद्यालय के चिकित्सक, शिक्षक एवं कर्मचारी शामिल हुए।
कार्यक्रम का शुभारंभ भगवान धन्वंतरि की वंदना एवं पूजन के साथ हुआ। इससे पूर्व विद्यार्थियों एवं शिक्षकों द्वारा आयुर्वेद जागरण मार्च निकाला गया, जिसके माध्यम से समाज में आयुर्वेद, स्वस्थ जीवनशैली एवं स्वास्थ्य संरक्षण के प्रति जागरूकता का संदेश दिया गया।
कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ. राजीव कुरेले ने मुख्य अतिथियों एवं उपस्थित अतिथियों का स्वागत करते हुए राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस के उद्देश्य तथा पिछले 15 दिनों में संकाय द्वारा आयोजित विभिन्न गतिविधियों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद केवल चिकित्सा पद्धति नहीं, बल्कि स्वस्थ जीवन जीने की समग्र जीवनदृष्टि है। विद्यार्थियों को आयुर्वेद के सिद्धांतों को समाज तक पहुंचाने में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।
कार्यक्रम के मुख्य सत्र की अध्यक्षता कैलाश हॉस्पिटल के सुप्रसिद्ध ईएनटी सर्जन डॉ. राजीव गुप्ता ने की। नितेश कांबोज विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम में प्रो. पंकज शर्मा, परिसर निदेशक, आयुर्वेद संकाय मुख्य परिसर, एवं डीन, उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय की गरिमामयी उपस्थिति रही। प्रश्न निदेशक प्रोफेसर पंकज शर्मा ने कहा कि आयुर्वेद एक जीवन पद्धति है आयुर्वेद को इसके सिद्धांत है उनका जीवन में उतरने की आवश्यकता है। आयुर्वेद में नवाचार रिसर्च और एविडेंस बेस्ड मेडिसिन इस पर कल्पना को अगर हम आयुर्वेद के ट्रेडिशनल विज्ञान के साथ जोड़ दें तो कल के लिए हम आयुर्वेद को एक भरोसेमंद चिकित्सा पद्धति के रूप में स्थापित कर सकते हैं और जो की एक राष्ट्रीय चिकित्सा पद्धति बनाने के लिए हम सबका एक सक्रिय योगदान अपेक्षितहै।
विद्यार्थियों ने प्रस्तुत किए नुक्कड़ नाटक
राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस के अवसर पर बीएएमएस 2022 एवं 2025 बैच के विद्यार्थियों ने स्वास्थ्य एवं आयुर्वेद आधारित नुक्कड़ नाटक एवं नाट्य मंचन प्रस्तुत कर उपस्थित लोगों को स्वस्थ जीवनशैली, रोगों से बचाव तथा आयुर्वेद के महत्व का संदेश दिया। विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों को उपस्थित शिक्षकों एवं अतिथियों ने सराहा।
राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस के उपलक्ष्य में पिछले लगभग 15 दिनों से विभिन्न जागरूकता एवं शैक्षणिक गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा था। इनमें स्वास्थ्य शिविर, विद्यार्थियों एवं शिक्षकों के प्रबोधन कार्यक्रम, औषधीय पौधों का प्लांटेशन, पोस्टर प्रतियोगिता, Rising Sun Selfie गतिविधि, मीडिया संवाद, समाचार-पत्रों में लेख प्रकाशन, स्लोगन प्रतियोगिता तथा अन्य जन-जागरूकता कार्यक्रम प्रमुख रहे।
इन गतिविधियों का उद्देश्य विद्यार्थियों को आयुर्वेद की परंपरा, सिद्धांतों एवं आधुनिक संदर्भ में इसकी उपयोगिता से जोड़ने के साथ-साथ समाज में स्वास्थ्य संरक्षण और रोग-निवारण के प्रति जागरूकता बढ़ाना रहा।
शिक्षकों एवं विद्यार्थियों की रही सहभागिता
कार्यक्रम में वरिष्ठ शिक्षक एवं चिकित्सक डॉ. नंदकिशोर दाधीच, डॉ. अमित तमाड्डी, डॉ. एस.पी. सिंह, डॉ. सुनील पांडे, डॉ. ऋचा शर्मा, डॉ. प्रदीप सेमवाल, मुख्य फार्मेसी अधिकारी डॉ. विवेक तिवारी सहित संकाय के शिक्षकगण, चिकित्सक, कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में बीएएमएस विद्यार्थी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. वर्षा सक्सेना ने किया। अंत में डॉ. ऋषि आर्य ने सभी अतिथियों, शिक्षकों, कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों का आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम के माध्यम से विश्वविद्यालय ने यह संदेश दिया कि आयुर्वेद की मूल अवधारणा—स्वास्थ्य की रक्षा और रोगी के स्वास्थ्य की पुनर्स्थापना—आज भी स्वस्थ समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
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