सचिवालय में राज्य-विशिष्ट प्रारूप टिप्पणी को अंतिम रूप देने पर चर्चा, भूमि हस्तांतरण, यूटिलिटी शिफ्टिंग और मुआवजे की प्रक्रिया सुधारने पर जोर
देहरादून। प्रदेश में सड़क, बिजली और अन्य बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के क्रियान्वयन में आने वाली बाधाओं को दूर करने के लिए शासन ने कवायद तेज कर दी है। भूमि अधिग्रहण, वन भूमि हस्तांतरण, भूमि पर कब्जा मिलने में देरी और यूटिलिटी शिफ्टिंग जैसे मामलों के समाधान के लिए राज्य-विशिष्ट प्रारूप टिप्पणी को अंतिम रूप दिया जा रहा है। शासन का जोर प्रक्रियाओं को अधिक प्रभावी बनाने, विभागों के बीच समन्वय बढ़ाने और अनुमतियों के लिए समयबद्ध व्यवस्था विकसित करने पर है।
इसी सिलसिले में सचिवालय में सचिव, लोक निर्माण विभाग डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय की अध्यक्षता में बैठक आयोजित की गई। बैठक में अवधारणा-पत्र और विभिन्न हितधारक विभागों से प्राप्त सुझावों के आधार पर प्रारूप टिप्पणी पर चर्चा की गई। पीपीटी प्रस्तुतीकरण के माध्यम से विकास कार्यों के क्रियान्वयन में सामने आ रही चुनौतियों और उनके संभावित समाधान भी रखे गए।
भूमि से लेकर वन मंजूरी तक, हर स्तर की बाधा पर चर्चा
बैठक में पीएम गतिशक्ति पोर्टल, भूमि राशि पोर्टल और परिवेश पोर्टल से जुड़े विषयों की समीक्षा की गई। इसके साथ ही भूमि अधिग्रहण, भूमि पर कब्जे का हस्तांतरण, वन भूमि हस्तांतरण, भूमि नामांतरण (म्यूटेशन), लैंड बैंक और रॉयल्टी से जुड़े मामलों पर भी विचार-विमर्श हुआ।
राइट ऑफ वे (RoW) से बाहर स्थित संपत्तियों को होने वाले नुकसान के मुआवजे और यूटिलिटी शिफ्टिंग की प्रक्रिया को भी चर्चा में शामिल किया गया। इन विषयों का सीधा संबंध विभिन्न विकास परियोजनाओं की समयबद्ध प्रगति से है। बैठक में सिंगल विंडो व्यवस्था के तहत ठेकेदारों के आवेदनों पर निर्धारित समय में अनुमति देने की प्रक्रिया को प्रभावी बनाने के सुझाव भी प्रस्तुत किए गए।
कागजी कार्रवाई अधूरी रही तो अटक सकते हैं प्रकरण
सचिव डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय ने कहा कि विकास कार्यों को प्रभावी ढंग से पूरा करने के लिए संबंधित एजेंसियों को प्रत्येक प्रकरण के दस्तावेजीकरण पर विशेष ध्यान देना होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि मामलों की विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने के साथ संबंधित नियमों और प्रक्रियाओं का समुचित अध्ययन भी जरूरी है।
उन्होंने संबंधित विभागों और कार्यदायी एजेंसियों को समस्याओं के समाधान के लिए अपने स्तर पर प्रभावी पहल करने पर जोर दिया। उनका कहना था कि स्थानीय परिस्थितियों और लोगों की समस्याओं को समझे बिना कई मामलों का व्यावहारिक समाधान निकालना कठिन हो सकता है। इसलिए स्थानीय लोगों से संवाद स्थापित कर उनकी चिंताओं को समझा जाए और उसी के अनुरूप समाधान तलाशे जाएं।
अधिकारियों और कर्मचारियों को दिया जाएगा प्रशिक्षण
बैठक में यह भी जोर दिया गया कि जिन विभागों और कार्यदायी एजेंसियों के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को नियमों, प्रक्रियाओं या तकनीकी पहलुओं की जानकारी के लिए प्रशिक्षण की आवश्यकता है, उनके लिए आवश्यक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएं। इससे प्रकरणों के निस्तारण में प्रक्रियागत गलतियों को कम करने और विभागीय कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिल सकती है।
बैठक में आयुक्त एवं सचिव, राजस्व परिषद रंजना राजगुरु, अपर सचिव विनीत कुमार, सेतु आयोग के सलाहकार विशाल पाराशर, लोक निर्माण विभाग के अधीक्षण अभियंता मनोज कुमार बिष्ट, यूपीसीएल के अधीक्षण अभियंता अरुण कांत, पिटकुल के अधीक्षण अभियंता राकेश कुमार और यूजेवीएनएल के डीजीएम मुकेश वर्मा सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे। प्रदेश के सभी जनपदों से जिलाधिकारी, मुख्य विकास अधिकारी और अपर जिलाधिकारी वर्चुअल माध्यम से बैठक में शामिल हुए।













